आनन्द के लुटे खजाने भजन लिरिक्स एक बहुत ही सुंदर और आध्यात्मिक भजन है जो गुरु की महिमा और सच्चे सुख के रहस्य को दर्शाता है। इस भजन में बताया गया है कि वास्तविक आनंद और शांति केवल सतगुरु की शरण में ही मिलती है, ना कि धन-दौलत या संसारिक चीजों में।
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आनन्द के लुटे खजाने भजन लिरिक्स
आनन्द के लुटे खजाने भाई,
सतगुरु के दरबार में ।।
कोठी बंगले कारों की भाई,
कमी नहीं उनके पास में ।
वो भी यूँ कहते हैं,
हम सुखी नहीं संसार में ।।
आनन्द के लुटे खजाने भाई,
सतगुरु के दरबार में ।।
धन में सुख और देखने वालो,
धनवानों से पूछ लो भाई,
एक पल की फुर्सत नाही,
जीवन के विचार में ।।
जीवन के विचार में भाई,
जीवन के विचार में ।।
आनन्द के लुटे खजाने भाई,
सतगुरु के दरबार में ।।
भाई बंधु कुटुंब कबीला,
जितना लंबा परिवार,
देखे रोज कचहरी,
आपस के तकरार में ।।
आपस के तकरार में भाई,
आपस के तकरार में ।।
आनन्द के लुटे खजाने भाई,
सतगुरु के दरबार में ।।
ना सुख घर में रहने से भाई,
ना सुख वन में जाने से,
गुरु भोला नाथ समझावे,
सुख है आत्म विश्वास में ।।
है आत्म विश्वास में भाई,
है आत्म विश्वास में ।।
आनन्द के लुटे खजाने भाई,
सतगुरु के दरबार में ।।
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Anand ke Lute Khajane Bhai Lyrics
Anand ke lute khajane bhai,
Satguru ke darbar mein.
Kothi bangle caron ki bhai,
Kami nahi unke paas mein,
Wo bhi yun kehte hain,
Hum sukhi nahi sansar mein.
Anand ke lute khajane bhai,
Satguru ke darbar mein.
Dhan mein sukh aur dekhne walo,
Dhanwano se pooch lo bhai,
Ek pal ki fursat nahi,
Jeevan ke vichar mein.
Jeevan ke vichar mein bhai,
Jeevan ke vichar mein.
Anand ke lute khajane bhai,
Satguru ke darbar mein.
Bhai bandhu kutumb kabeela,
Jitna lamba parivaar,
Dekhe roz kachahari,
Aapas ke takraar mein.
Aapas ke takraar mein bhai,
Aapas ke takraar mein.
Anand ke lute khajane bhai,
Satguru ke darbar mein.
Na sukh ghar mein rehne se bhai,
Na sukh van mein jaane se,
Guru Bhola Nath samjhaave,
Sukh hai aatm vishwas mein.
Hai aatm vishwas mein bhai,
Hai aatm vishwas mein.
Anand ke lute khajane bhai,
Satguru ke darbar mein.
आनन्द के लुटे खजाने भजन लिरिक्स का अर्थ
आनन्द के लुटे खजाने भाई सतगुरु के दरबार में भजन लिरिक्स हमें यह सिखाता है कि सच्चा सुख और आनंद संसार की भौतिक चीजों में नहीं, बल्कि गुरु की शरण और आत्मविश्वास में होता है।
इस भजन में बताया गया है कि चाहे व्यक्ति के पास कितना भी धन या बड़ा परिवार हो, अगर मन में शांति नहीं है तो वह सुखी नहीं हो सकता। सच्ची खुशी केवल सतगुरु के मार्गदर्शन से ही मिलती है।
आनन्द के लुटे खजाने भजन लिरिक्स FAQs
Q1. यह भजन किस पर आधारित है?
उतर: यह भजन सतगुरु की महिमा और सच्चे सुख के महत्व पर आधारित है।
Q2. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उतर: इसका मुख्य संदेश है कि सच्चा आनंद केवल गुरु की शरण में ही मिलता है।
Q3. यह भजन कहाँ गाया जाता है?
उतर: यह भजन सत्संग और भक्ति कार्यक्रमों में गाया जाता है।
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