पापी के मुख से राम कोनी निकले भजन लिरिक्स

पापी के मुख से राम कोनी निकले भजन लिरिक्स एक प्रसिद्ध राजस्थानी सत्संगी और चेतावनी भजन है, जो मनुष्य को जीवन का सही मार्ग अपनाने और प्रभु नाम स्मरण करने की प्रेरणा देता है। इस भजन में सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है कि जिस व्यक्ति के मन में भक्ति और सत्कर्म नहीं होते, वह जीवन के असली मूल्य को नहीं समझ पाता। यह भजन सत्संग और संतवाणी में बड़े भाव से गाया जाता है।

पापी के मुख से राम कोनी निकले भजन लिरिक्स

पापी के मुख से राम कोनी निकले,
केशर घुल रही गारा में,
मिनख जमारो बंदा ऐलो मत खोवै रे,
सुखरत करले जमारा नै,
पापी के मुख से राम कोनी निकसै,
केशर घुल रही गारा में ॥टेर॥

भैस पद्मणी ने गैणों तो पहरायो,
कांई जाणै पहरण हारा ने ।
पहर कौनी जाणै बा तो चाल कोनी जाणै रे,
उमर गमादी गोबर गारा में ॥1॥

सोने के थाल में सूरी ने परोसी,
कांई जाणै जीमन हारा ने ।
जीम कोनी जाणै बा तो जूठ कोनी जाणै रे,
हुरड़ हुरड़ करती जमारा ने ॥2॥

काँच के महल में कुत्ती ने सुवाई,
कांई जाणै सोवण हारा ने ।
सोय कोनी जाणै बा तो ओढ़ कोनी जाणै रे,
घुस घुस मरगी गलियारा में ॥3॥

मानक मोती मुर्खा ने दीन्या,
दलबा तो बैट गया सारा नै ।
हीरा की पारख जोहरी जाणै,
कांई बेरो मुरख गँवारा नै ॥4॥

अमृतनाथजी अमर हो गया जोगी,
जार गया काँचे पारा ने ।
भूरा भजन हरिराम का करले,
हर मिलसी दशवां द्वारा में ॥5॥

Singer: Gulab Nath Ji

Papi Ke Mukh Se Ram Koni Nikse Bhajan Lyrics

Papi ke mukh se Ram koni nikse,
Kesher ghul rahi gaara mein.

Minakh jamaro banda ailo mat khovai re,
Sukhrit karle jamara nai.

Bhais padmani ne gaino to pehrayo,
Kain jaanai pehran haara ne.

Sone ke thaal mein soori ne parosi,
Kain jaanai jeeman haara ne.

Kaanch ke mahal mein kuttie ne suwai,
Kain jaanai sovan haara ne.

Maanak moti murkha ne dinya,
Heera ki paarkh johri jaanai.

Bhura bhajan Hariram ka karle,
Har milsi dashwan dwaar mein.

पापी के मुख से राम कोनी निकले भजन लिरिक्स का अर्थ

इस भजन में संतों ने उदाहरणों के माध्यम से समझाया है कि जिस व्यक्ति के मन में भक्ति, विवेक और सत्कर्म नहीं होते, वह जीवन के असली महत्व को नहीं समझ पाता।

भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपना जीवन व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए और समय रहते भगवान राम का भजन करना चाहिए।

पापी के मुख से राम कोनी निकले भजन लिरिक्स का सारांश

यह एक लोकप्रिय राजस्थानी चेतावनी भजन है, जिसमें सांसारिक मोह-माया और अज्ञानता पर गहरा संदेश दिया गया है।

भजन के शब्द मनुष्य को जागरूक करते हैं कि भगवान का नाम ही सच्चा धन है और जीवन को भक्ति तथा अच्छे कर्मों में लगाना चाहिए।

FAQs – पापी के मुख से राम कोनी निकले भजन लिरिक्स

Q1. पापी के मुख से राम कोनी निकले भजन लिरिक्स किस प्रकार का है?

Answer: यह एक राजस्थानी सत्संगी और चेतावनी भजन है।

Q2. इस भजन में क्या संदेश दिया गया है?

Answer: इसमें भगवान के नाम स्मरण, सत्कर्म और विवेकपूर्ण जीवन जीने का संदेश दिया गया है।

Q3. यह भजन कहाँ गाया जाता है?

Answer: पापी के मुख से राम कोनी निकले भजन लिरिक्स सत्संग, संतवाणी और भजन संध्या में गाया जाता है।

Q4. इस भजन में “हीरा की पारख जोहरी जाणै” का क्या अर्थ है?

Answer: इसका अर्थ है कि असली मूल्य को केवल ज्ञानी और समझदार व्यक्ति ही पहचान सकता है।

Q5. क्या इस भजन के Lyrics हिंदी और English दोनों में उपलब्ध हैं?

Answer: हाँ, यहां इस भजन के Lyrics हिंदी और English दोनों भाषाओं में दिए गए हैं।

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