सुन्न घर शहर शहर घर बस्ती लिरिक्स

सुन्न घर शहर शहर घर बस्ती लिरिक्स इन हिंदी एक गूढ़ आध्यात्मिक भजन है, जिसमें योग, साधना और आत्मज्ञान का गहरा संदेश छिपा है। यह भजन संत परंपरा की वाणी को दर्शाता है और हमें भीतर की खोज करने की प्रेरणा देता है।

सुन्न घर शहर शहर घर बस्ती लिरिक्स इन हिंदी

सुन्न घर शहर, शहर घर बस्ती
कुण सोव कुण जागे है ।
साध हमारे हम साधन के
तन सोवे ब्रह्म जागे है ।।

जल विच कमल कमल विच कलियाँ
भँवर वासना लेता है
पांचू चेला फिरे अकेला
अलख अलख जोगी करता है ।।

भंवर गुफा में तपसी तापै
तपसी तपस्या करता है
अस्त्र, वस्त्र कछु नहीं रखता
नागा निर्भय रहता है ।।

एक अप्सरा आगै ऊबी
दूजी सुरमो सारे है
तीजी सुषमण सेज बिछावे
परण्या नहीं कंवारा है ।।

एक पिलंग पर दो नर सूत्या
कुण सोवै कुण जागै है
च्यारूं पाया दिवला जोया
चोर किसी विध लागै है ।।

परण्या पेली पुत्र जलमिया
मात-पिता मन भाया है
शरण मच्छेन्द्र जती गोरख बोल्या
एक अखंडी नै ध्याया है ।।

जीवत जोगी माया भोगी
मरया पछ नर माणी है
खोजो खबर करो घट भीतर
“जोगाराम” की बाणी है ।।

Singer : Gulab Nathji

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Sunn Ghar Shahar Lyrics In Hindi

Sunn ghar shahar, shahar ghar basti,
Kun sov kun jaage hai,
Saadh hamare hum saadhan ke,
Tan sove brahm jaage hai.

Jal vich kamal kamal vich kaliyaan,
Bhanwar vaasana leta hai,
Paanchu chela phire akela,
Alakh alakh jogi karta hai.

Bhanwar gufa mein tapasi taapai,
Tapasi tapasya karta hai,
Astra vastra kachu nahi rakhta,
Naaga nirbhay rehta hai.

Ek apsara aage oobi,
Dooji surmo saare hai,
Teeji sushman sej bichhaave,
Paranya nahi kanwaara hai.

Ek pilang par do nar soota,
Kun sove kun jaage hai,
Chyarun paaya divla joya,
Chor kisi vidh laage hai.

Paranya peli putra jalmia,
Maat pita man bhaaya hai,
Sharan Machhendra jati Gorakh bolya,
Ek akhandi nai dhyaaya hai.

Jeevat jogi maya bhogi,
Marya pachh nar maani hai,
Khojo khabar karo ghat bheetar,
“Jogarām” ki baani hai.

सुन्न घर शहर शहर घर बस्ती लिरिक्स इन हिंदी का अर्थ

यह भजन आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है। इसमें बताया गया है कि शरीर सो सकता है, लेकिन आत्मा हमेशा जागृत रहती है। योगी वह है जो भीतर की सच्चाई को पहचानता है। इसके अलावा, इस भजन में योग और साधना का भी गहरा महत्व बताया गया है।

  • बाहरी दुनिया माया है, असली सत्य भीतर है
  • साधना से आत्मज्ञान प्राप्त होता है
  • योगी निर्भय और स्वतंत्र होता है

सुन्न घर शहर शहर घर बस्ती लिरिक्स इन हिंदी का संदेश

यह भजन हमें जीवन की सबसे गहरी सच्चाई से परिचित कराता है—कि वास्तविक दुनिया बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर बसती है। “सुन्न घर” का अर्थ है शून्य या वह अवस्था जहाँ मन पूरी तरह शांत हो जाता है। जब मन की चंचलता समाप्त होती है, तब ही इंसान अपने असली स्वरूप को पहचान पाता है।

यही कारण है कि भजन बार-बार यह संकेत देता है कि बाहरी भागदौड़, दिखावा और मोह-माया में उलझकर हम अपने असली उद्देश्य से दूर हो जाते हैं।

सुन्न घर शहर शहर घर बस्ती भजन FAQs

Q1. सुन्न घर शहर शहर घर बस्ती लिरिक्स इन हिंदी किस प्रकार का है?
Answer: यह एक आध्यात्मिक और योग आधारित भजन है।

Q2. “तन सोवे ब्रह्म जागे है” का क्या अर्थ है?
Answer: इसका मतलब है कि शरीर सो सकता है, लेकिन आत्मा हमेशा जागृत रहती है।

Q3. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
Answer: आत्मज्ञान और भीतर की खोज का महत्व।

Q4. इसमें किन संतों का उल्लेख है?
Answer: इसमें मच्छेन्द्रनाथ और गोरखनाथ का उल्लेख है।

Q5. यह भजन हमें क्या सिखाता है?
Answer: यह भजन हमें आत्मचिंतन और सच्चे ज्ञान की ओर प्रेरित करता है।

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