समझ मन माँयलारै बीरा मेरा मैली चादर धोय लिरिक्स

समझ मन माँयलारै बीरा मेरा मैली चादर धोय लिरिक्स | Samajh Man Maaylare Lyrics In Hindi: यह सुंदर सत्संग भजन आत्मा की शुद्धि, गुरु भक्ति और जीवन के वास्तविक ज्ञान का संदेश देता है। “समझ मन माँयलारै” भजन में मानव जीवन को मैली चादर के रूप में समझाया गया है, जिसे सत्संग, भक्ति और गुरु कृपा से ही निर्मल बनाया जा सकता है। गुलाब नाथ जी द्वारा गाया गया यह भजन भक्तों को आत्मचिंतन और सतमार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

समझ मन माँयलारै बीरा मेरा मैली चादर धोय लिरिक्स

समझ मन माँयलारै,
बीरा मेरा मैली चादर धोय।
बिन धोयाँ दुख ना मिटै रै,
बीरा मेरा तिरणा किस बिध होय ॥टेर॥

देवी सुमराँ शारदा रै,
बीरा मेरा हिरदै उजाला होय।
गुरुवाँ री गम गैला मिल्या रे,
बीरा मेरा आदु अस्तल जोय ॥1॥

दाता चिणाई बावड़ी रै,
ज्यामें नीर गगजल होय।
कई कई हरिजन न्हा चल्या रै,
कई गया है जमारो खोय ॥2॥

रोईड़ी रंग फूटरो रै,
जाराँ फूल अजब रंग होय।
ऊबो मिखमी भोम मे रै,
जांकी कलियन विणजै कोई ॥3॥

चंदन रो रंग सांवलो रै,
जाँका मरम न जाने कोय।
काट्या कंचन निपजै रै,
ज्यामे महक सुगन्धी होय ॥4॥

तन का बनाले कापडा रै,
सुरता की साबुन होय।
सुरत शीला पर देया फटकाया रै,
सतगुरु देसी धोय ॥5॥

लिखमा भिखमी भौम में रै,
ज्याँरो गाँव गया गम होय।
तीजी चौकी लांधजा रै,
चौथी में निर्भय होय ॥6॥

Singer & Lyrics Credit: Gulab Nathji Maharaj
Video Credit: Original YouTube Channel & Creator

समझ मन माँयलारै बीरा मेरा मैली चादर धोय लिरिक्स भजन का भावार्थ

यह भजन मनुष्य को अपने जीवन और आत्मा को शुद्ध करने की प्रेरणा देता है। भजन में “मैली चादर” मानव शरीर और मन के पापों व मोह-माया का प्रतीक है। संत बताते हैं कि बिना गुरु ज्ञान, सत्संग और भक्ति के जीवन के दुख समाप्त नहीं होते। सतगुरु की कृपा और सच्चे मार्ग पर चलकर ही मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सकता है। यह भजन आत्मज्ञान, वैराग्य और गुरु महिमा का सुंदर संदेश देता है।

समझ मन माँयलारै बीरा मेरा मैली चादर धोय लिरिक्स FAQS

Q1. समझ मन माँयलारै बीरा मेरा मैली चादर धोय लिरिक्स भजन किसने गाया है?

Ans: इस भजन को श्री गुलाब नाथ जी ने गाया है।

Q2. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

Ans: इस भजन का मुख्य संदेश आत्मा की शुद्धि, गुरु भक्ति और सत्संग की महिमा है।

Q3. “मैली चादर” का क्या अर्थ है?

Ans: “मैली चादर” मनुष्य के मन और जीवन में मौजूद पाप, मोह और अज्ञान का प्रतीक है।

Q4. यह भजन किस प्रकार के कार्यक्रमों में गाया जाता है?

Ans: यह भजन सत्संग, गुरु भक्ति कार्यक्रमों और भजन संध्या में गाया जाता है।

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