सतगुरुवाँ से मिलबा चालो ऐ सजो सिनगारो लिरिक्स

सतगुरुवाँ से मिलबा चालो ऐ सजो सिनगारो हिंदी लिरिक्स एक गहरा आध्यात्मिक भजन है जो साधक को सतगुरु की शरण में जाने के लिए प्रेरित करता है। इसमें बाहरी श्रृंगार नहीं बल्कि मन की शुद्धि, भक्ति और आत्मज्ञान को असली सजावट बताया गया है।

सतगुरुवाँ से मिलबा चालो ऐ सजो सिनगारो हिंदी लिरिक्स

सतगुरुवाँ से मिलबा चालो ऐ,
सजो सिनगारो ॥टेर॥

नीर गंगाजल सिर पर डारो,
कचरो परै विडारो ये ।
मन मैले ने मल मल धोल्यो,

गम को घाघरो पैर सुहागण,
नेम को नाड़ो सारो ये ।
जरणा री गाँठ जुगत से दिज्यो,
लोग हँसेगो सारो ये ॥2॥

सत की स्यालु ओढ़ सुहागण,
प्रेम की पटली मारो ये ।
राम नाम को गोटो लगाकर,
ज्ञान घूंघटो सारो ये ॥3॥

ओर पियो मेरे दाय कोनी आवै,
पियो करुँ करतारो ये ।
मेरो पियो मेरे घट में बसत है,
पलक होवे न न्यारो ये ॥4॥

नाथ गुलाब मिल्या गुरु पुरा,
म्हाने दियो शबद ललकारो ये ।
भानी नाथ गुराँजी के शरणै,
सहजाँ मिल्यो किनारो ये ॥5॥

सिंगर: प्रकाश दास जी

Satguruwan Se Milba Chalo Ae Sajo Singaro Lyrics

Satguruwan se milba chalo ae,
Sajo singaro.

Neer gangajal sir par daaro,
Kacharo pare vidaro ye,
Man maile ne mal mal dholyo.

Gam ko ghaghro pair suhagan,
Nem ko naado saaro ye,
Jarna ri ganth jugat se dijyo,
Log hansego saaro ye.

Sat ki syalu odh suhagan,
Prem ki patli maaro ye,
Ram naam ko goto lagakar,
Gyan ghoonghato saaro ye.

Or piyo mere daay koni aave,
Piyo karu kartaro ye,
Mero piyo mere ghat mein basat hai,
Palak hove na nyaro ye.

Naath Gulab milya guru pura,
Mhane diyo shabad lalkaro ye,
Bhani Naath guraji ke sharanai,
Sahaja milyo kinara ye.

सतगुरुवाँ से मिलबा चालो ऐ सजो सिनगारो हिंदी लिरिक्स का अर्थ

यह भजन हमें सिखाता है कि सतगुरु से मिलने के लिए केवल बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि अंदर से शुद्ध होना जरूरी है। “गंगाजल” और “सिनगार” का अर्थ है अपने मन को पवित्र बनाना और बुरे विचारों को दूर करना।

भजन में यह भी बताया गया है कि सच्चा श्रृंगार सत्य, प्रेम और नियम (नेम) से होता है। जब मनुष्य राम नाम का स्मरण करता है और ज्ञान को अपनाता है, तब उसका जीवन सफल और सार्थक बन जाता है।

सतगुरुवाँ से मिलबा चालो ऐ सजो सिनगारो हिंदी लिरिक्स का महत्व

“घूंघट” और “गहने” जैसे शब्द इस भजन में प्रतीक रूप में इस्तेमाल किए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि भक्ति और ज्ञान ही जीवन के असली आभूषण हैं। बाहरी दुनिया में खोजने की बजाय, परमात्मा हमारे भीतर ही निवास करता है।

अंत में, यह भजन हमें सिखाता है कि जब सच्चे गुरु मिल जाते हैं, तब जीवन का मार्ग स्पष्ट हो जाता है और साधक को सहज ही मुक्ति (किनारा) प्राप्त हो जाती है।

सतगुरुवाँ से मिलबा चालो ऐ सजो सिनगारो हिंदी लिरिक्स FAQs

Q1. सतगुरुवाँ से मिलबा चालो ऐ सजो सिनगारो हिंदी लिरिक्स का मुख्य संदेश क्या है?
Answer: यह भजन सिखाता है कि आत्मशुद्धि और सतगुरु की शरण से ही जीवन सफल होता है।

Q2. “सिनगार” का क्या अर्थ है?
Answer: यहां “सिनगार” का अर्थ बाहरी सजावट नहीं, बल्कि मन की पवित्रता और भक्ति है।

Q3. गंगाजल का क्या प्रतीक है?
Answer: यह पवित्रता और आत्मशुद्धि का प्रतीक है।

Q4. भजन में “राम नाम” क्यों महत्वपूर्ण है?
Answer: राम नाम का स्मरण मन को शुद्ध करता है और मोक्ष की ओर ले जाता है।

Q5. इस भजन से हमें क्या सीख मिलती है?
Answer: हमें सच्चे गुरु की शरण में जाकर आत्मज्ञान प्राप्त करना चाहिए।

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