राजा भरथरी से अरज करे लिरिक्स

राजा भरथरी से अरज करे लिरिक्स एक प्रसिद्ध भजन है जो वैराग्य, गुरु भक्ति और जीवन की सच्चाई को दर्शाता है। इस भजन में राजा भरथरी के राज-पाट त्यागकर योगी बनने की कथा को भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यह bhajan hindi lyrics आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

राजा भरथरी से अरज करे लिरिक्स

राजा भरथरी से अरज करे,
महलो में खड़ी महारानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।

नगर उज्जैन के राजा भरथरी,
हो घोड़े असवार,
एक दिन राजा दूर जंगल में,
खेलन गए शिकार,
बिछड़ गए जब संग के साथी,
राजा भये लाचार,
किस्मत ने जब करवट बदली,
छुटा दिए घर बार,
अब होनहार टाली ना टले,
समझे कोनी दुनिया दीवानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।

काला सा एक मिरग देखकर,
तीर तान कर मारा,
तीर कलेजा चीर गया,
मृग धरनी पे पड़ा बेचारा,
व्याकुल होकर हिरणी बोली,
ओ पापी हत्यारा,
मिरगे के संग में सती होवांगी,
हिरणी का डाह पुकारा,
रो रो के फरियाद करे,
राजा भये अज्ञानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।

राजा जंगल में रुदन करे,
गुरु गोरखनाथ पधारे,
मिरगे को प्राण दान दे तपसी,
राजा का जनम सुधारे,
उसी समय में राजा भरथरी,
तन के वस्त्र उतारे,
ले गुरुमंत्र बन गया जोगी,
अंग भभूति रमाये,
घर घर अलख जगाता फिरे,
बोले मधुर वाणी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।

गुरु गोरख की आग्या भरथरी,
महलों में अलख जगाता,
भर मोतियन को थाल ल्याई दासी,
ले जोगी सुखदाता,
ना चाहिए तेरा माणक मोती,
चुठी चून की चाहता,
भिक्षा ल्यूँगा जब ड्योढ़ी पर,
आवेगी पिंघला माता,
राणी के नैना से नीर ढलें जद,
पियाजी की सुरत पिछाणी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।

भाग दौड़ के पति चरणों में,
लिपट गई महारानी,
बेदर्दी तोहे दया नहीं आई,
सुनले मेरी कहानी,
बाली उमर नादान नाथ मेरी,
कैसे कटे जिंदगानी,
पिवजी छोड़ो जोग,
राज करो बोले प्रेम दीवानी,
थारे अन्न का भण्डार भरया,
थे मौज करो मनमानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।

धूप छांव सी काया माया,
दुनिया बहता पानी,
अमर नाम मालिक को रहसी,
सोच समझ अज्ञानी,
भजन करो भव सिंधु तरो,
यूँ कहता लिखमो ज्ञानी,
नई नई रंगत गावे माधोसिंह,
हवा जमाने की जानी,
राम का भजन करो नर प्यारे,
तेरी दो दिन की जिंदगानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।

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राजा भरथरी से अरज करे लिरिक्स का अर्थ

राजा भरथरी से अरज करे लिरिक्स का अर्थ है कि जीवन की असली सच्चाई संसार की माया से अलग होकर भक्ति और वैराग्य में है। यह भजन हमें सिखाता है कि धन-दौलत और राज-पाट क्षणिक हैं, जबकि गुरु ज्ञान और भगवान का नाम ही स्थायी है।

राजा भरथरी से अरज करे लिरिक्स का महत्व

राजा भरथरी से अरज करे लिरिक्स का महत्व बहुत गहरा है क्योंकि यह भजन हमें जीवन की वास्तविकता समझाता है। इसमें त्याग, गुरु भक्ति और सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है, जो हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

राजा भरथरी से अरज करे लिरिक्स FAQs

Q1. राजा भरथरी से अरज करे भजन किस पर आधारित है?
उत्तर: यह भजन राजा भरथरी के वैराग्य और योगी बनने की कथा पर आधारित है।

Q2. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: संसार की माया त्यागकर भक्ति का मार्ग अपनाना।

Q3. क्या यह भजन रोज पढ़ सकते हैं?
उत्तर: हाँ, इससे मन को शांति मिलती है।

Q4. गुरु गोरखनाथ का क्या महत्व है?
उत्तर: उन्होंने राजा भरथरी को ज्ञान देकर उनका जीवन बदल दिया।

Q5. यह भजन किस भाषा में है?
उत्तर: यह भजन हिंदी और लोकभाषा में है।

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