कायर सके ना झेल फकीरी हिंदी लिरिक्स एक गहरा आध्यात्मिक और चेतावनी भजन है, जो संत मार्ग और फकीरी जीवन की कठिनाई और सच्चाई को दर्शाता है। इस भजन में बताया गया है कि फकीरी का मार्ग आसान नहीं, इसे वही निभा सकता है जो सच्चा साधक हो।
कायर सके ना झेल फकीरी हिंदी लिरिक्स
कायर सके ना झेल,
फकीरी अलबेला को खेल॥टेर॥
ज्यूँ रण माँय लडे नर सूरा,
अणियाँ झुक रहना सेल।
गोली नाल जुजरबा चालै,
सन्मुख लेवै झेल ॥1॥
सती पति संग नीसरी,
अपने पिया के गैल।
सुरत लगी अपने साहिब से,
अग्नि काया बिच मेल ॥2॥
अलल पक्षी ज्यूँ उलटा चाले,
बांस भरत नट खेल।
मेरु इक्कीस छेद गढ़ बंका,
चढ़गी अगम के महल ॥3॥
दो और एक रवे नहीं दूजा,
आप आप को खेल।
कहे सामर्थ कोई असल पिछाणै,
लेवै गरीबी झेल ॥4॥
Kair Sake Na Jhel Fakiri Albela Ko Khel Hindi Lyrics
Kayar sake na jhel,
Fakiri albela ko khel.
Jyun ran maay lade nar soora,
Aniyan jhuk rehna sel.
Goli naal jujarba chaale,
Sanmukh levai jhel.
Sati pati sang neesari,
Apne piya ke gail.
Surat lagi apne sahib se,
Agni kaya bich mel.
Alal pakshi jyun ulta chaale,
Baans bharat nat khel.
Meru ikkis chhed gadh banka,
Chadhgi agam ke mahal.
Do aur ek rave nahi dooja,
Aap aap ko khel.
Kahe samarth koi asal pichhanai,
Levai gareebi jhel.
कायर सके ना झेल फकीरी हिंदी लिरिक्स भजन का अर्थ
इस भजन में संत बताते हैं कि फकीरी (साधु जीवन) कोई साधारण रास्ता नहीं है। यह मार्ग युद्ध के समान कठिन है, जिसमें साहस, त्याग और सच्चे समर्पण की जरूरत होती है।
- जैसे युद्ध में वीर योद्धा सामने से वार झेलता है, वैसे ही साधक को जीवन की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- सती का अपने पति के प्रति समर्पण, उसी तरह भक्त का अपने भगवान के प्रति होना चाहिए।
- अंत में संत कहते हैं कि जो व्यक्ति असली ज्ञान को पहचान लेता है, वही इस फकीरी मार्ग को निभा सकता है।
कायर सके ना झेल फकीरी हिंदी लिरिक्स भजन का संदेश
यह भजन हमें सिखाता है कि आध्यात्मिक मार्ग पर चलना आसान नहीं होता। इसमें धैर्य, त्याग और दृढ़ विश्वास की आवश्यकता होती है।
कायर सके ना झेल फकीरी हिंदी लिरिक्स FAQs
Q1. कायर सके ना झेल फकीरी हिंदी लिरिक्स भजन किस प्रकार का है?
Answer: यह एक चेतावनी और आध्यात्मिक भजन है जो फकीरी जीवन का महत्व बताता है।
Q2. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
Answer: इसका संदेश है कि फकीरी मार्ग कठिन है और इसे केवल सच्चे साधक ही निभा सकते हैं।
Q3. क्या यह भजन संत परंपरा से जुड़ा है?
Answer: हाँ, यह भजन संत परंपरा और साधु जीवन की शिक्षा से जुड़ा हुआ है।
Q4. इस भजन में “फकीरी” का क्या अर्थ है?
Answer: फकीरी का अर्थ है त्याग, सादगी और भगवान में पूर्ण समर्पण का जीवन।
Q5. क्या यह भजन आज के समय में भी प्रासंगिक है?
Answer: हाँ, यह भजन आज भी हमें जीवन के सही मार्ग और सच्चाई को समझने की प्रेरणा देता है।











