नाथ जी भजन लिरिक्स हिंदी भारतीय संत परंपरा, गुरु भक्ति, वैराग्य और आत्मज्ञान का अनमोल खजाना हैं। इन भजनों में जीवन की सच्चाई, गुरु की महिमा, ईश्वर का स्मरण और आत्मा के कल्याण का संदेश मिलता है। यदि आप संतवाणी, नाथ संप्रदाय और आध्यात्मिक भजनों के प्रेमी हैं, तो यह संग्रह आपके लिए अत्यंत उपयोगी है।
हमने लोकप्रिय संत श्री रतिनाथ नाथ जी भजन लिरिक्स हिंदी का संग्रह प्रस्तुत किया है, जिन्हें भक्तजन सत्संग, भजन संध्या और धार्मिक आयोजनों में बड़े प्रेम से गाते हैं।
Table of श्री रतिनाथ नाथ जी भजन लिरिक्स हिंदी
1.घट में बसे रे भगवान लिरिक्स इन हिंदी
घट में बसे रे भगवान लिरिक्स इन हिंदी| Ghat mein base re Bhagwan Lyrics In Hindi: बताता है कि परमात्मा बाहर नहीं बल्कि प्रत्येक जीव के हृदय में निवास करते हैं। मनुष्य मंदिरों और तीर्थों में ईश्वर को खोजता है, जबकि भगवान उसके अपने अंतःकरण में विराजमान हैं।
घट में बसे रे भगवान,
मंदिर में काँई ढूंढ़ती फिरे म्हारी सुरता ॥टेर॥
मुरती कोर मंदिर में मेली,
बा सुख से नहीं बोलै।
दरवाजे दरबान खड्या है,
बिना हुकम नहीं खोलै ॥1॥
गगन मण्डल से गंगा उतरी,
पाँचू कपड़ा धोले ।
बिण साबण तेरा मैल कटेगा,
हरभज निर्मल होले ॥2॥
सौदागर से सौदा करले,
जचता मोल करालै ।
जे तेरे मन में फर्क आवेतो,
घाल तराजू में तोले ॥3॥
नाथ गुलाब मिल्या गुरु पूरा,
दिल का परदा खोले ।
भानीनाथ शरण सतगुरु की,
राई कै पर्वत ओलै ॥4॥
सिंगर: अनीता जांगिड
2. अब तो मान कहयो मेरी माय लिरिक्स इन हिंदी – नाथ जी भजन लिरिक्स हिंदी
यह एक भावपूर्ण संतवाणी भजन है जिसमें साधक अपनी माता और संसार को समझाते हुए ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मान कहयो मेरी माय,
मनै सांवरियो परणाय,
सांवरियो परणाय मात मेरी,
सांवरियो परणाय ।।टेर।।
ऐसे वर को क्या वरु जो,
जनम और मर जाय ।
वर करीये एक सांवरो रे,
अमर चूड़ो हो जाय ।।
मान कहयो मेरी माय,
मनै सांवरियो परणाय ।।1।।
जहर पियालो राणो भेजियो रे,
दयो मीरा ने जाय ।
कर चरणामृत पी गई रे,
थे जाणो रधुनाथ ।
मान कहयो मेरी माय,
मनै सांवरियो परणाय ।।2।।
सर्प पिटारो राणो भेजियो रे,
दयो मीरा ने जाय ।
खोल पिटारो मीरा पहरियो रे,
बण गयो नौशर हार ।।
मान कहयो मेरी माय,
मनै सांवरियो परणाय ।।3।।
मीरा हर की लाडली रे,
राणों बन को ठूंठ ।
समझायो समझ्यो नहीं रे,
ले जाती बैकुंठ ।।
मान कहयो मेरी माय,
मनै सांवरियो परणाय ।।4।।
मीरा जन्मी मेड़ते रे,
राणों गढ़ चित्तोड ।
कलियुग में भगति करी रे,
गुरु मिल्या रैदास ।।
मान कहयो मेरी माय,
मनै सांवरियो परणाय ।।5।।
3. सतगुरु साहेब बंदा एक है जी भजन लिरिक्स
इस भजन में गुरु और परमात्मा की एकता का सुंदर वर्णन किया गया है। सच्चे सतगुरु की शरण में जाकर जीव जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो सकता है।
सतगुरु साहेब बंदा एक है जी,
भोली साधुडा से किस्योड़ी भिरांत म्हारा बीरा रे
साध रे पियालो रल भेला पिव जी ॥
धोबिड़ा सा धोव गुरु का कपडा रे
कोई तन मन साबण ल्याय म्हारा बिरा रे
तन रे सीला रे मन साबणा रे
ये तो मैला मैला धुप धुप जाय म्हारा बिरा रे ॥
काया रे नगरिये में आमली रे
ज्या पर कोयालड़ी तो करे र किलोल
कोयलडया रे शबद सुहावना रे
बे तो उड़ उड़ लागे गुरु के पाँव म्हारा बिरा रे ॥
काया रे नागरिये में हाटडी रे
ज्या पर बिणज करे साहूकार म्हारा बिरा रे
कई तो करोड़ी धज हो चल्या रे
कई गया ह जमारो हार म्हारा बिरा रे ॥
सीप रे समन्दरिये में निपजे रे
कोई मोतिड़ा तो निपजे सीपा माय म्हारा बिरा रे
बूंद रे पड़ रे हरी के नाम की रे
कोई लखियो बिरला सा साध म्हारा बिरा रे
सतगुरु शबद उचारिया रे ॥
कोई रटीयो साँस म साँस म्हारा बिरा रे
देव रे डूंगरपुरी बोलिया रे
जांका सत अमरापुर बास म्हारा बिरा रे
कृष्णं वन्दे जगत गुरुं ॥
4. तेरा बिरहन नैण उघाड़ भजन लिरिक्स
यह भजन आत्मा और परमात्मा के विरह भाव को दर्शाता है। भक्त अपने प्रभु के दर्शन के लिए तड़पता है और उनकी कृपा की याचना करता है।
तेरा बिरहन नैण उघाड़
तेरा बिरहन नैण उघाड़
एरी बावली ए गयो तो जमारो हार ।।टेर।।
भलाई म्हारी हेली हंस्लो बटाऊ एक लोग,
रहेलो इक रैन पिया रो ए,
यो तो प्रभात्या उड़ ज्याय,
कुच कर ज्यावलो सवेरो ए ।।टेर।।
भलाई म्हारी हैली निरख बदनडा रा रूप,
योवन तेरो भयो मतवालों रे,
तू तो लियो कोनि राम को नाम,
काम भोली किसडो संवारयो ए ।।टेर।।
भलाई म्हारी हेली धर नटवा रो भेष,
कू नार घर बार बिगड्यो ए,
तू तो ठग खायो संसार,
मायला में बस रयो कालो ए ।।टेर।।
भलाई म्हारी हेली तरबिण्या लंघज्याय,
मिलेगो तेरो प्रीतम प्यारो ए,,
तू तो सुमरण सेज संवार,
ऐरी नार मत करिये नटारो ए ।।टेर।।
भलाई म्हारी हेली मिल गया नाथ गुलाब,
मंदरिये म भयो उजियालो ए,
गुण गावे गावे भानीनाथ
साध बण गयो मतवारो ए
5. मन मस्त हुआ फिर क्या बोले भजन लिरिक्स
यह प्रसिद्ध संतवाणी भजन आध्यात्मिक आनंद और आत्मिक शांति का वर्णन करता है। जब मन प्रभु प्रेम में डूब जाता है, तब संसार की बातें महत्वहीन हो जाती हैं।
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले।
क्या बोले फिर क्या बोले ,
मस्त हुआ फिर क्या बोले ।।
हीरा पाया बाँध गठरियाँ ,
बार बार बांको क्यों खोले।
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले ।।
हंसा नहावे मान सरोवर ,
ताल तलैया क्यों नहावे ।
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले ।।
हल्की थी तब चढ़ी तराजू ,
पूरी भई बांको क्यों तोले।
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले ।।
सूरत कलाळी भई मतवाली ,
मदवा पी गयी अण तोले।
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले ।।
तेरा सायब है तुझ माही ,
बाहर नैना क्यों खोले।
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले ।।
कहत कबीर सुनो भाई साधो ,
साहेब मिल गये तिल तोले।
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले ।।
6. राजा भरथरी से अरज करे भजन लिरिक्स
राजा भरथरी के वैराग्य और आध्यात्मिक जीवन से प्रेरित यह भजन संसार की नश्वरता और भक्ति के महत्व को उजागर करता है।
राजा भरथरी से अरज करे,
महलो में खड़ी महारानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।
नगर उज्जैन के राजा भरथरी,
हो घोड़े असवार,
एक दिन राजा दूर जंगल में,
खेलन गए शिकार,
बिछड गए जब संग के साथी,
राजा भये लाचार,
किस्मत ने जब करवट बदली,
छुटा दिए घर बार,
अब होनहार टाली ना टले,
समझे कोनी दुनिया दीवानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।
काला सा एक मिरग देखकर,
तीर ताण कर मारा,
तीर कलेजा चीर गया,
मृग धरणी पे पड़ा बेचारा,
व्याकुल होकर हिरणी बोली,
ओ पापी हत्यारा,
मिरगे के संग में सती होवांगी,
हिरणी का डाह पुकारा,
रो रो के फ़रियाद करे,
राजा भये अज्ञानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।
राजा जंगल में रुदन करे,
गुरु गोरखनाथ पधारे,
मिरगे को प्राण दान दे तपसी,
राजा का जनम सुधारे,
उसी समय में राजा भरथरी,
तन के वस्त्र उतारे,
ले गुरुमंत्र बन गया जोगी,
अंग भभूति रमाये,
घर घर अलख जगाता फिरे,
बोले मधुर वाणी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।
गुरु गोरख की आग्या भरथरी,
महलों में अलख जगाता,
भर मोतियन को थाल ल्याई दासी,
ले जोगी सुखदाता,
ना चाहिए तेरा माणक मोती,
चुठी चून की चाहता,
भिक्षा ल्यूँगा जद ड्योढ़ी पर,
आवेगी पिंघला माता,
राणी के नैना से नीर ढलें जद,
पियाजी की सुरत पिछाणी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।
भाग दोड़ के पति चरणों में,
लिपट गई महाराणी,
बेदर्दी तोहे दया नहीं आई,
सुनले मेरी कहानी,
बाली उमर नादान नाथ मेरी,
कैसे कटे जिंदगानी,
पिवजी छोडो जोग,
राज करो बोले प्रेम दीवानी,
थारे अन्न का भण्डार भरया,
थे मौज करो मनमानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।
धुप छाव सी काया माया,
दुनिया बहता पाणी,
अमर नाम मालिक को रहसी,
सोच समझ अज्ञानी,
भजन करो भव सिन्धु तरो,
यूँ कहता ‘लिखमो’ ज्ञानी,
नई नई रंगत गावे ‘माधोसिंह’,
हवा जमाने की ज्यानी,
राम का भजन करो नर प्यारे,
तेरी दो दिन की जिंदगानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।
राजा भरथरी से अरज करे,
महलो में खड़ी महारानी,
राज पाट तज बन गया जोगी,
ये क्या दिल में ठानी।।
गायक – श्री रतिनाथ जी
Upload By – प्रेम भाई
7. रामा चले त्रिलोकी बल छलने भजन लिरिक्स
यह भजन भगवान राम की लीलाओं और धर्म स्थापना के दिव्य उद्देश्य का वर्णन करता है। भक्तों के बीच यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है।
रामा चले त्रिलोकी बल छलने
बल छलने को चले नारायण,
ओढ़ी मोहन टोपी,
हाथ डांगडी लेयी बांस की,
दाबी बगल म सांवरो,
ब्रम्हा जी की पोथी ।।टेर।।
हाथ जोड़ बल राजा,
उभ्यों के धन मांगे जोशी,
जो चावे सो मांग ले ब्राह्मण,
लेसी सोही तेरे हाजिर होसी ।।टेर।।
तीन पांवडा भूमि दे,
दे बन कुट्य्या छोटी,
तेरी नगरी को धरम बताऊ
बैठे बैठे बांचू म तो ब्रह्मा जी की पोथी ।।टेर।।
तीन पांवडा को के धन माग्यो,
काई गुजरो होसी,
तुलसीदास आस रघुवर की,
तीन पांवडा तेर कन पुरा कोनी होसी ।।टेर।।
8. कैसे जीतें हैं भला लोग हरी नाम बिना भजन लिरिक्स
इस भजन का मुख्य संदेश है कि हरी नाम के बिना जीवन की वास्तविक सफलता संभव नहीं है। ईश्वर का नाम ही मोक्ष और शांति का मार्ग है।
कैसे जीतें हैं भला लोग हरी नाम बिना !!
कैसे जीतें हैं भला लोग हरी नाम बिना,
उनका जीना नहीं जीना है प्रभु नाम बिना ।।टेर ।।
एक यही नाम तुम्हें पार करेगा भव से,
पार हो सकते नहीं इसके सहारे के बिना ।।टेर ।।
जिन्दगी चार दिनों की है गुजर जायेगी,
जाना ही होगा अकेले तुम्हे अपनों के बिना ।।टेर ।।
वक्त ठहरा ही नहीं और ना ठहरेगा कभी,
हो गयी देर तो पछताओगे सतसंग के बिना ।।टेर ।।
“रामा” कहता है लगन हरी से लगा कर देखो,
आयेगा खुद ही जहां में तुम्हे जीने का मज़ा ।।टेर ।।
9. सतगुरु मेरा ऐसा रंग चढ़ाया भजन लिरिक्स
गुरु कृपा से जीवन में आने वाले परिवर्तन और आध्यात्मिक जागरण का सुंदर वर्णन इस भजन में मिलता है। यह नाथ संप्रदाय के लोकप्रिय भजनों में से एक है।
सतगुरु मेरा ऐसा रंग चढ़ाया,
गुरासा ऐसा रंग चढ़ाया ।
जो न उतरे तीन काल में,
दिन दिन होत सवाया ।।टेर।।
श्याम श्वेत पीला नहीं नीला ,
अदभुत वर्ण बनाया ।
नेत्र नहीं पहचान सकत है,
गुरु गम भेद लखाया ।।टेर।।
ह्रदय वस्त्र पर रंग भक्ति का,
लागत परम सुहाया ।
ज्ञान विज्ञान लहरिया कीन्हा,
ओढ़ परम सुख पाया ।।टेर।।
छीपी छाप सके नहीं वैसा,
ना रंगरेज रंगाया ।
कहन सुनन में आवत नाही,
सतगुरु सैन बताया ।।टेर।।
चम्पानाथजी प्रेम के रंग में,
रंग कत्था पहिनाया ।
सहज शून्य में लगी समाधी,
बठे अमृतनाथजी सुहाया ।।टेर।।
10. म्हारे गुरांजी मिलण रो पूरो चाव हिंदी लिरिक्स
म्हारे गुरांजी मिलण रो पूरो चाव |
म्हारे गुरांजी मिलण रो पूरो चाव,
उम्मेदी दिल में लाग रही ॥
म्हारे उम्मेदी ऐसी लगी जी,
निर्धानियां धन होय ।
बांझनार पुत्र ने तरसे,
मैं तरसुं दाता तोय ॥1॥
नैया पड़ी मझधार में जी,
अध बिच झोला खाय ।
सतगुरु केवटिया होकर,
म्हारी नैया नै पार लगाय ॥2॥
सतगुरु मेरे समद हैं जी,
मैं गलियन को नीर ।
उलट समद में मिल गई,
कंचन भयो शरीर ॥3॥
जग रूठे तो रूठन दे,
मेरे सतगुरु रूठे नांय ।
जो मेरे दाता राजी हों तो,
रूठ्या मना लू करतार ॥4॥
गुरु गहरा गुरु भावरा,
गुरु देवन के देव ।
रामानन्द का भणत कबीरा,
केवल पायो उपदेश ॥5॥
11. कळप मत काछब कुड़ी ए भजन लिरिक्स

कळप मत काछब कुड़ी ए लिरिक्स | Kalap Mat Kachhab Kudi Ye Lyrics in Hindi
कळप मत काछब कुड़ी ए
रमय्ये री बाता रूडी ए
भक्ति का भेद भारी रे
लख कोई संतां का प्यारा ।।
काछवो काछ्वी रेता समद म,
होया हरी का दास,
साधू आवत देख के रे,
सती नवाया शीश,
पकड़ झोळी म घाल्या रे,
मरण की अब के बारी रे ।।
कहे कछ्वी सुण रे काछवा,
भाग सके तो भाग,
घाल हांडी में चोडसी रे,
तळ लगावे आँच,
पड्यो हांडी में सीज रे,
रूस गयो कृष्ण मुरारी रे ।।
कहे काछ्वो सुण ए काछवी,
मन में धीरज राख,
त्यारण वालो त्यारसी रे,
सीतापति रघुनाथ,
भगत न त्यारण आवे रे,
गोविन्दो दोड्यो आवे रे ।।
कहे काछ्वो सुण रे सांवरा,
भव लगादे पार,
आज सुरजिया उदय नहीं होवे,
आवे अमीरी मोत,
भगत की हांसी होव रे,
ओळमो आवे थाने रे ।।
उतराखंड से चली बादळी,
इन्द्र रयो घरराय,
तीन तूळया रि झोपड़ी रे,
चढ़ी आकाशा जाय,
पाणी की बूंदा बरसे रे,
धरड धड इन्द्र गाजे रे ।।
किसनाराम की विनती साधो,
सुनियो चित्त लगाय,
जुग जुग भगत बचाइया रे,
आयो भगत के काज,
गावे यो जोगी बाणी रे,
गावे यो पध निरबाणी रे ।।
Singer: Sant Rati Nath Ji Maharaj
12. हर भज हर भज हीरा परख ले भजन लिरिक्स

हर भज हर भज हीरा परख ले लिरिक्स | Har Bhaj Har Bhaj Heera Parakh Le Lyrics in Hindi: एक प्रसिद्ध निर्गुण संत भजन है, जो जीवन के वास्तविक उद्देश्य, आत्मज्ञान और सतगुरु की महिमा को दर्शाता है।
हर भज हर भज हीरा परख ले,
समझ पकड़ नर मजबूती ।
अष्ट कमल पर खेल मेरे दाता,
और वार्ता सब झूठी ॥
इन्द्र घटा ले सतगुरु आया,
अम्रत बुंदा हद बूँटी ।
त्रिवेणी के रंग महल में,
साधा लाला हद लूटी
हर भज हर भज हीरा परख ले ॥
इण काया में पाँच चोर है,
जिनकी पकड़ो सिर चोटी ।
पाँचो ने मार पच्चीस वश करले,
जद जाणा तेरी रजपुती ।।
हर भज हर भज हीरा परख ले ॥
सत सुमरण का सैल बणाले,
ढाल बणाले धीरज की ।
काम, क्रोध ने मार हटा दे,
जद जाणु थारी मजबुती ।।
हर भज हर भज हीरा परख ले ॥
झरम झरमर बाजा बाजै,
झिलमिल ज्योतो वे जलती ।
ओंकार पर रणोकार है हँसला,
चुग गया निज मोती ।।
हर भज हर भज हीरा परख ले ॥
पक्की घड़ी का तोल बणाले,
काण ने राखो एक रती ।
गुरु चरणे मछेन्द्र बोले,
अलख लख्या सो खरा जती ।।
हर भज हर भज हीरा परख ले ॥
Singer: Sant Rati Nath Ji Maharaj
नाथ जी भजनों का महत्व
नाथ संप्रदाय के भजन केवल संगीत नहीं बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान का स्रोत हैं। इन भजनों में गुरु भक्ति, वैराग्य, आत्मचिंतन और ईश्वर प्रेम का संदेश मिलता है। संतों ने सरल भाषा में जीवन के गहरे रहस्यों को इन भजनों के माध्यम से समझाया है।
नाथ जी भजन लिरिक्स हिंदी पढ़ने के लाभ
- मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
- गुरु भक्ति और ईश्वर विश्वास मजबूत होता है।
- आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि होती है।
- वैराग्य और आत्मचिंतन की भावना विकसित होती है।
- जीवन की समस्याओं को समझने की नई दृष्टि मिलती है।
निष्कर्ष
यदि आप श्री नाथजी भजन हिंदी लिरिक्स, नाथ संप्रदाय भजन, गोरखनाथ भजन लिरिक्स और सतगुरु भजन पढ़ना पसंद करते हैं, तो ऊपर दिए गए सभी भजन अवश्य पढ़ें। ये भजन न केवल भक्ति का अनुभव कराते हैं बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा भी प्रदान करते हैं।
श्री नाथजी भजन हिंदी लिरिक्स FAQs
प्रश्न:1 नाथ जी भजन क्या होते हैं?
उत्तर: नाथ संप्रदाय, संत परंपरा और गुरु भक्ति से जुड़े भजनों को नाथ जी भजन कहा जाता है।
प्रश्न:2 नाथ जी भजनों का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: गुरु महिमा, आत्मज्ञान, वैराग्य और ईश्वर भक्ति।
प्रश्न:3 क्या नाथ जी भजन लिरिक्स हिंदी सत्संग में गाए जाते हैं?
उत्तर: हाँ, ये भजन सत्संग, कथा, संतवाणी कार्यक्रम और भजन संध्या में विशेष रूप से गाए जाते हैं।
प्रश्न:4 नाथ जी भजन लिरिक्स हिंदी कहाँ पढ़ें?
उत्तर: आप इस श्रेणी में सभी लोकप्रिय नाथ जी भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ सकते हैं।











