काया का पिंजरा डोले रे लिरिक्स

काया का पिंजरा डोले रे लिरिक्स एक अत्यंत लोकप्रिय संतवाणी और चेतावनी भजन है, जो मानव जीवन की नश्वरता और आत्मा की सच्चाई को दर्शाता है। इस भजन में शरीर को पिंजरा और सांस को पंछी के रूप में बताया गया है, जो एक दिन इस संसार को छोड़कर चला जाएगा।

यह भजन संत कबीर की वाणी और आध्यात्मिक ज्ञान से प्रेरित है, जो मनुष्य को अहंकार त्यागकर प्रभु भक्ति और सत्कर्म करने की प्रेरणा देता है।

काया का पिंजरा डोले रे लिरिक्स

दोहा

कबीर कुआ एक है, पनिहारी अनेक।
बर्तन सब के न्यारे न्यारे, पानी सब में एक।।

काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे।
पिंजरा डोले रे,
काया का पिंजरा डोले रे।।

तन नगरी मन मंदिर है,
परमात्मा इसके अंदर है।
दो नैन असंख्य समुन्द्र है,
पापी पाप को धोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे।।1।।

ले के साक्षी जाना है,
और जाने से क्या घबराना है।
ये दुनिया मुसाफिर खाना है,
तूँ जाग जगत ये सोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे।।2।।

कर्म अनुसारी फल ले रे,
और मनमानी अपनी करले रे।
तेरा घमंड सारा झडले रे,
अभिमानी मान क्यूँ डोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे।।3।।

मातपिता भाईबहन पतिपत्नी,
कोई नहीं तूँ किसी का रे।
कह कबीर झगड़ा जीते जी का,
अब मन ही मन क्यूँ डोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे।।4।।

सिंगर – NandLal Bhaat

Kaya Ka Pinjra Dole Re Lyrics

Kabir kua ek hai, panihari anek,
Bartan sab ke nyaare nyaare, paani sab mein ek.

Kaya ka pinjra dole re,
Saans ka panchhi bole re.

Tan nagari man mandir hai,
Parmatma iske andar hai,
Do nain asankhya samundar hai,
Paapi paap ko dhole re.

Le ke saakshi jaana hai,
Aur jaane se kya ghabrana hai,
Ye duniya musafir khaana hai,
Tu jaag jagat ye sole re.

Karm anusari phal le re,
Aur manmaani apni karle re,
Tera ghamand saara jhadle re,
Abhimani maan kyun dole re.

Maat pita bhai behan pati patni,
Koi nahi tu kisi ka re,
Kah Kabir jhagda jeete ji ka,
Ab man hi man kyun dole re.

काया का पिंजरा डोले रे लिरिक्स का अर्थ

इस भजन में मानव शरीर को एक पिंजरे और सांस को पंछी के रूप में दर्शाया गया है। संत कबीर बताते हैं कि यह शरीर नश्वर है और आत्मा एक दिन इसे छोड़कर चली जाएगी।

भजन का संदेश है कि मनुष्य को अहंकार, मोह-माया और झगड़ों से दूर रहकर प्रभु भक्ति और अच्छे कर्मों में जीवन बिताना चाहिए।

काया का पिंजरा डोले रे लिरिक्स भजन का सारांश

“काया का पिंजरा डोले रे” एक प्रसिद्ध संत भजन है जो जीवन की सच्चाई और आत्मज्ञान का संदेश देता है।

यह भजन सत्संग और संतवाणी कार्यक्रमों में बड़े भाव से गाया जाता है। इसके शब्द मनुष्य को जागरूक करते हैं कि संसार अस्थायी है और केवल प्रभु नाम ही सच्चा सहारा है।

FAQs – काया का पिंजरा डोले रे लिरिक्स

Q1. काया का पिंजरा डोले रे लिरिक्स भजन किस प्रकार का है?

Answer: यह एक संतवाणी और चेतावनी भजन है।

Q2. इस भजन में “सांस का पंछी” किसे कहा गया है?

Answer: यहां “सांस का पंछी” आत्मा और जीवन शक्ति का प्रतीक है।

Q3. इस भजन में क्या संदेश दिया गया है?

Answer: इसमें जीवन की नश्वरता, आत्मज्ञान और प्रभु भक्ति का संदेश दिया गया है।

Q4. यह भजन किसकी वाणी से प्रेरित है?

Answer: यह भजन संत कबीर की शिक्षाओं और संतवाणी से प्रेरित है।

Q5. यह भजन कहाँ गाया जाता है?

Answer: यह भजन सत्संग, संतवाणी और भजन संध्या में गाया जाता है।

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