भजन बिना कोई न जागै रे लगन बिना लिरिक्स एक प्रसिद्ध राजस्थानी सत्संगी भजन है, जो हमें भक्ति, सत्संग और गुरु महिमा का गहरा संदेश देता है। इस भजन में बताया गया है कि बिना प्रभु भजन और सच्ची लगन के आत्मिक जागरण संभव नहीं है। संतों की संगति और राम नाम का स्मरण ही जीवन को सफल बनाता है।
भजन बिना कोई न जागै रे लगन बिना लिरिक्स
भजन बिना कोई न जागै रे,
लगन बिना कोई न जागै रै ।
तेरा जनम जनम का पाप करेड़ा,
रंग किस बिध लागे रै ॥टेर॥
संता की संगत करी कोनी भँवरा,
भरम कैयाँ भागै रै ।
राम नाम की सार कोनी जाणै,
बाताँ मे आगै रै ॥1॥
या संसार काल वाली गीन्डी,
टोरा लागे रै ।
गुरु गम चोट सही कोनी जावै,
पगाँ ने लागे रै ॥2॥
सत सुमिरण का सैल बणाले,
संता सागे रै ।
नार सुषमणा राड़ लडै जद,
जमड़ा भागै रै ॥3॥
नाथ गुलाब सत संगत करले,
संता सागे रै ।
भानीनाथ अरज कर गावै,
सतगुराँजी के आगै रै ॥4॥
Singer: Gulab Nath Ji
Bhajan Bina Koi Na Jag Re Bhajan Lyrics
Bhajan bina koi na jaage re,
lagan bina koi na jaage re ।
Tera janam janam ka paap kareda,
rang kis bidh laage re ॥
Santa ki sangat kari koni bhavra,
bharam kaiyaan bhaage re ।
Raam naam ki saar koni jaanai,
baataan mein aage re ॥
Ya sansaar kaal wali geendi,
tora laage re ।
Guru gam chot sahi koni jaave,
paga ne laage re ॥
Sat sumiran ka sail banale,
santa saage re ।
Naar sushmna raad ladae jad,
jamda bhaage re ॥
Naath gulaab sat sangat karle,
santa saage re ।
Bhaninath arj kar gaave,
Satguranji ke aage re ॥
भजन बिना कोई न जागै रे लगन बिना लिरिक्स भजन का भावार्थ
यह सुंदर सत्संगी भजन हमें बताता है कि बिना भजन और भगवान के नाम के मनुष्य का जीवन अधूरा है। केवल संसार की बातों में उलझकर आत्मिक शांति प्राप्त नहीं होती। संतों की संगति, गुरु का ज्ञान और सतनाम का स्मरण ही जीवन को सही दिशा देता है। यह भजन हमें माया-मोह छोड़कर प्रभु भक्ति में लगने और सत्संग से जुड़ने की प्रेरणा देता है।
भजन बिना कोई न जागै रे लगन बिना लिरिक्स भजन की विशेषता
यह भजन सत्संग, गुरु महिमा और राम नाम की शक्ति का गहरा संदेश देता है। ग्रामीण और राजस्थानी सत्संगी भजनों में यह भजन विशेष रूप से लोकप्रिय है। भजन बिना कोई न जागै रे लगन बिना लिरिक्स के शब्द सरल होते हुए भी जीवन का गहरा सत्य समझाते हैं कि बिना भक्ति और संत संगति के आत्मिक जागरण संभव नहीं है। सत्संग कार्यक्रमों और भजन संध्या में इसे श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
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FAQs – भजन बिना कोई न जागै रे लगन बिना लिरिक्स
Q1. भजन बिना कोई न जागै रे लगन बिना लिरिक्स भजन का क्या अर्थ है?
Ans: यह भजन बताता है कि बिना भगवान के भजन, सत्संग और सच्ची लगन के आत्मिक जागरण संभव नहीं है। प्रभु नाम ही जीवन को सही दिशा देता है।
Q2. यह भजन किस प्रकार का भजन है?
Ans: यह एक राजस्थानी सत्संगी और ज्ञानवर्धक भजन है, जिसमें गुरु महिमा, सत्संग और राम नाम की महत्ता का वर्णन किया गया है।
Q3. इस भजन को किस अवसर पर गाया जाता है?
Ans: यह भजन सत्संग, भजन संध्या, कथा कार्यक्रम और धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
Q4. “भजन बिना कोई न जागै रे” भजन से क्या शिक्षा मिलती है?
Ans: यह भजन हमें संतों की संगति करने, गुरु ज्ञान अपनाने और भगवान के नाम का स्मरण करने की प्रेरणा देता है।
Q5. क्या यह भजन राजस्थानी भाषा में है?
Ans: हाँ, यह भजन राजस्थानी लोकभाषा और सत्संगी शैली में लिखा गया प्रसिद्ध भजन है।











