हो घोड़े असवार भरथरी भजन लिरिक्स

हो घोड़े असवार भरथरी भजन लिरिक्स एक प्रसिद्ध लोक एवं सत्संगी भजन है, जिसमें राजा भरथरी के वैराग्य और ज्ञान प्राप्ति की कथा का सुंदर वर्णन मिलता है। यह भजन हमें संसार की नश्वरता, मोह-माया और सच्चे ज्ञान का संदेश देता है। यदि आप भरथरी भजन लिरिक्स, राजस्थानी सत्संगी भजन या लोक भजन lyrics in Hindi खोज रहे हैं, तो यह भजन आपके मन को आध्यात्मिक भाव से भर देगा।

हो घोड़े असवार भरथरी भजन लिरिक्स

हो घोड़े असवार भरथरी,
बियाबान मँ भटक्या।
बन कै अन्दर तपै महात्मा,
देख भरथरी अटक्या ॥टेर॥

घोड़े पर से तुरत कूद कर,
चरणां शीश नवाया।
आर्शीवाद देह साधू ने,
आसन पर बैठाया॥
बडे प्रेम सँ जाय कुटी मँ,
एक अमर फल ल्याया।
इस फल को तू खाले राजा,
अमर होज्या तेरी काया॥
राजा नै ले लिया अमर फल,
तुरत जेव मँ पटक्या।
बन कै अन्दर तपै महात्मा,
देख भरथरी अटक्या ॥1॥

राजी होकर चल्या भरथरी,
रंग महल मँ आया।
राणी को जा दिया अमरफल,
गुण उसका बतलाया॥
निरभागण राणी नै भी,
वो नहीं अमर फल खाया।
चाकर सँ था प्रेम महोबत,
उसको जा बतलाया ॥
प्रेमी रै मन प्रेमी बसता,
प्रेम जिगर मँ खटक्या।
बन कै अन्दर तपै महात्मा,
देख भरथरी अटक्या ॥2॥

उसी शहर की गणिका सेती,
थी चाकर की यारी।
उसको जाकर दिया अमरफल,
थी राणी सँ प्यारी॥
अमर होयकर क्या करणा है,
गणिका बात बिचारी।
राजा को जा दिया अमरफल,
इस को खा तपधारी॥
राजा नै पहचान लिया है,
होठ भूप का छिटक्या।
बन कै अन्दर तपै महात्मा,
देख भरथरी अटक्या ॥3॥

क्रोधित होकर राज बोल्या,
ये फल कित सँ ल्याई।
गणित सोच्या ज्यान का खतरा,
साँची बात बताई॥
चाकर दीन्या भेद खोल,
जद होणै लगी पिटाई।
हरिनारायण शर्मा कहता,
बात समझ में आई॥
उपज्जा ज्ञान भरथरी को जद,
बण बैरागी भटक्या।
बन कै अन्दर तपै महात्मा,
देख भरथरी अटक्या॥4॥

Singer: Shri Rati Nathji Maharaj

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हो घोड़े असवार भरथरी भजन लिरिक्स का भावार्थ

यह भजन राजा भरथरी के जीवन से जुड़ी वैराग्य कथा को दर्शाता है। अमर फल की घटना के माध्यम से राजा को संसार की सच्चाई और रिश्तों की अस्थिरता का ज्ञान होता है। अंत में वे राजपाट छोड़कर वैरागी बन जाते हैं। यह भजन हमें मोह-माया से दूर रहकर भक्ति और आत्मज्ञान की राह अपनाने की प्रेरणा देता है।

FAQs – हो घोड़े असवार भरथरी भजन लिरिक्स

Q1. हो घोड़े असवार भरथरी भजन किस पर आधारित है?

Ans: यह भजन राजा भरथरी के जीवन, वैराग्य और आत्मज्ञान की कथा पर आधारित है।

Q2. इस भजन से क्या शिक्षा मिलती है?

Ans: यह भजन सिखाता है कि संसार की माया और रिश्ते क्षणभंगुर हैं, जबकि आत्मज्ञान और भक्ति ही सच्चा मार्ग है।

Q3. यह भजन किस भाषा में है?

Ans: यह भजन राजस्थानी लोकभाषा और सत्संगी शैली में लिखा गया है।

Q4. भरथरी कौन थे?

Ans: राजा भरथरी उज्जैन के प्रसिद्ध राजा थे, जिन्होंने बाद में वैराग्य अपनाकर साधु जीवन धारण किया।

Q5. यह भजन कहाँ गाया जाता है?

Ans: यह भजन सत्संग, लोक भजन कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

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