मैं नहीं माखन खायो मैया मोरी भजन लिरिक्स

मैं नहीं माखन खायो मैया मोरी भजन लिरिक्स | Main Nahi Makhan Khayo Maiya Mori Lyrics In Hindi भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित अत्यंत लोकप्रिय भजन है। इस भजन में नटखट कान्हा अपनी माता यशोदा से बड़े ही मासूम अंदाज़ में कहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया। यह भजन श्रीकृष्ण की बाल सुलभ चंचलता, प्रेम और वात्सल्य भाव को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है।

मैं नहीं माखन खायो मैया मोरी भजन लिरिक्स

मैं नहिं माखन खायो मैया मोरी,
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।।

भोर भयो गैयन के पाछे,
मधुवन मोहिं पठायो,
चार पहर बंसीबट भटक्यो,
साँझ परे घर आयो।।

मैं बालक बहिंयन को छोटो,
छींको किहि बिधि पायो,
ग्वाल बाल सब बैर परे हैं,
बरबस मुख लपटायो।।

तू जननी मन की अति भोरी,
इनके कहे पतिआयो,
जिय तेरे कछु भेद उपजि है,
जानि परायो जायो।।

यह लै अपनी लकुटि कमरिया,
बहुतहिं नाच नचायो,
‘सूरदास’ तब बिहँसि जसोदा,
लै उर कंठ लगायो।।

मैं नहिं माखन खायो मैया मोरी,
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।।

Singer Credit: Anup Jalota
Lyrics Credit: Surdas (परंपरागत रचना)
Video Credit: Original YouTube Channel & Creator

मैं नहीं माखन खायो मैया मोरी भजन लिरिक्स का भावार्थ

मैं नहीं माखन खायो मैया मोरी भजन लिरिक्स में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत मनमोहक चित्रण किया गया है। जब माता यशोदा उन्हें माखन चोरी का दोष देती हैं, तब बाल गोपाल बड़ी मासूमियत से स्वयं को निर्दोष बताते हैं। वे कहते हैं कि वे तो पूरे दिन गायों के साथ वन में थे और माखन खाने का अवसर ही नहीं मिला। इस भजन में भगवान और भक्त के बीच प्रेम, वात्सल्य और बाल सुलभ सरलता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

मैं नहीं माखन खायो मैया मोरी भजन लिरिक्स से मिलने वाली सीख

यह भजन केवल श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन नहीं करता, बल्कि माता और पुत्र के अटूट प्रेम को भी दर्शाता है। भगवान श्रीकृष्ण की नटखट लीलाएँ भक्तों के मन को आनंद से भर देती हैं और हमें सिखाती हैं कि ईश्वर के साथ प्रेमपूर्ण संबंध ही सच्ची भक्ति का आधार है। इस भजन का गायन जन्माष्टमी, कृष्ण भजन संध्या और सत्संग में विशेष रूप से किया जाता है।

Main Nahi Makhan Khayo Maiya Mori Lyrics (English)

Main Nahi Makhan Khayo Maiya Mori,
Maiya Mori Main Nahi Makhan Khayo.

Bhor Bhayo Gaiyan Ke Pache,
Madhuvan Mohi Pathayo,
Char Pahar Bansibat Bhatakyo,
Saanjh Pare Ghar Aayo.

Main Balak Bahinyan Ko Chhoto,
Chheenko Kihi Bidhi Paayo,
Gwal Bal Sab Bair Pare Hain,
Barbas Mukh Lapatayo.

Tu Janani Man Ki Ati Bhori,
Inke Kahe Patiyayo,
Jiya Tere Kachhu Bhed Upaji Hai,
Jaani Parayo Jayo.

Yah Lai Apni Lakuti Kamariya,
Bahutahin Naach Nachayo,
Surdas Tab Bihansi Jasoda,
Lai Ur Kanth Lagayo.

मैं नहीं माखन खायो मैया मोरी भजन लिरिक्स FAQ

प्रश्न 1: मैं नहीं माखन खायो मैया मोरी भजन लिरिक्स किस पर आधारित है?
उत्तर: यह भजन भगवान श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध माखन चोरी और बाल लीलाओं पर आधारित है।

प्रश्न 2: मैं नहीं माखन खायो मैया मोरी भजन लिरिक्स के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: यह प्रसिद्ध पद महान भक्त कवि सूरदास जी द्वारा रचित माना जाता है।

प्रश्न 3: यह भजन किस अवसर पर गाया जाता है?
उत्तर: जन्माष्टमी, कृष्ण जन्मोत्सव, भजन संध्या, सत्संग तथा श्रीकृष्ण पूजा के अवसर पर यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।

प्रश्न 4: इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यह भजन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माता यशोदा के वात्सल्य प्रेम और भक्त-भगवान के मधुर संबंध को दर्शाता है।

Follow & Join Our Community

Leave a Comment

WhatsApp Chat Button