कळप मत काछब कुड़ी ए लिरिक्स | Kalap Mat Kachhab Kudi Ye Lyrics in Hindi: एक प्रसिद्ध राजस्थानी संत भजन है, जो भगवान के प्रति अटूट विश्वास और सच्ची भक्ति की महिमा को दर्शाता है। इस भजन में कछुए और कछवी के माध्यम से भक्त और भगवान के संबंध को बहुत सुंदर तरीके से समझाया गया है। भजन यह संदेश देता है कि सच्चे भक्त की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं और कठिन समय में भी भक्त को धैर्य और विश्वास नहीं छोड़ना चाहिए।
कळप मत काछब कुड़ी ए लिरिक्स
कळप मत काछब कुड़ी ए
रमय्ये री बाता रूडी ए
भक्ति का भेद भारी रे
लख कोई संतां का प्यारा ।।
काछवो काछ्वी रेता समद म,
होया हरी का दास,
साधू आवत देख के रे,
सती नवाया शीश,
पकड़ झोळी म घाल्या रे,
मरण की अब के बारी रे ।।
कहे कछ्वी सुण रे काछवा,
भाग सके तो भाग,
घाल हांडी में चोडसी रे,
तळ लगावे आँच,
पड्यो हांडी में सीज रे,
रूस गयो कृष्ण मुरारी रे ।।
कहे काछ्वो सुण ए काछवी,
मन में धीरज राख,
त्यारण वालो त्यारसी रे,
सीतापति रघुनाथ,
भगत न त्यारण आवे रे,
गोविन्दो दोड्यो आवे रे ।।
कहे काछ्वो सुण रे सांवरा,
भव लगादे पार,
आज सुरजिया उदय नहीं होवे,
आवे अमीरी मोत,
भगत की हांसी होव रे,
ओळमो आवे थाने रे ।।
उतराखंड से चली बादळी,
इन्द्र रयो घरराय,
तीन तूळया रि झोपड़ी रे,
चढ़ी आकाशा जाय,
पाणी की बूंदा बरसे रे,
धरड धड इन्द्र गाजे रे ।।
किसनाराम की विनती साधो,
सुनियो चित्त लगाय,
जुग जुग भगत बचाइया रे,
आयो भगत के काज,
गावे यो जोगी बाणी रे,
गावे यो पध निरबाणी रे ।।
Singer: Sant Rati Nath Ji Maharaj
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कळप मत काछब कुड़ी ए लिरिक्स भजन का भावार्थ
इस भजन में कछुए और कछवी के माध्यम से यह समझाया गया है कि भगवान अपने भक्तों को कभी नहीं छोड़ते। जब भक्त संकट में होता है, तब भगवान स्वयं उसकी रक्षा के लिए आते हैं। यह भजन हमें कठिन समय में धैर्य, विश्वास और भक्ति बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
कळप मत काछब कुड़ी ए लिरिक्स भजन का महत्व
यह भजन राजस्थान और संत परंपरा में बहुत लोकप्रिय है। सत्संग, भजन संध्या और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में इसे विशेष रूप से गाया जाता है। यह भजन भक्तों के मन में भगवान के प्रति विश्वास और प्रेम को मजबूत करता है।
कळप मत काछब कुड़ी ए लिरिक्स FAQs
Q1. कळप मत काछब कुड़ी ए भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश है कि भगवान अपने सच्चे भक्तों की हर परिस्थिति में रक्षा करते हैं।
Q2. यह भजन किस भाषा में है?
उत्तर: यह भजन राजस्थानी भाषा में लिखा गया एक संत भजन है।
Q3. इस भजन में कछुए का क्या प्रतीक है?
उत्तर: कछुआ यहाँ भक्त का प्रतीक है, जो भगवान पर पूर्ण विश्वास रखता है।
Q4. यह भजन कहाँ गाया जाता है?
उत्तर: यह भजन सत्संग, भजन संध्या और संत सभाओं में गाया जाता है।
Q5. इस भजन से क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: इस भजन से यह प्रेरणा मिलती है कि कठिन समय में भी भगवान पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
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