काया नगर मझारा रे हंसला जिण खोज्या निस्तारा

यह काया नगर मझारा रे हंसला जिण खोज्या निस्तारा लिरिक्स गहरा चेतावनी और आध्यात्मिक भजन है, जो हमें बताता है कि यह शरीर (काया) ही एक नगर है और इसमें ही आत्मा (हंस) का निवास होता है। जो साधक इस काया के भीतर ही परम सत्य की खोज करता है, वही जीवन के असली उद्देश्य को समझकर मोक्ष प्राप्त करता है।

काया नगर मझारा रे हंसला जिण खोज्या निस्तारा लिरिक्स

काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।

लागी लगन हिये बिच गहरी,
कोन है मेटण वाला,
मस्तक ऊपर लिखी फकीरी,
लेख लिख्या करतारा,
काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।

सिंह और स्याळ दोनूँ रहता वन म,
चरता न्यारा न्यारा,
एक दिन मेळ मिल्यो मछली को,
सिंह न स्यार सुधारया,
काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।

गगन मंडल विच उरद मुख कुआ,
बहे अमृत का झारा,
सुगरा सुगरा पिव पिव छाक्या,
प्यासा जाय गवारां,
काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।

महर भई जद सतगुरु मिलिया,
खोल्या भरम का ताला,
जालिमगिरी सतगुरु शरणे,
राम भज्या निसतारा,
काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।

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Kaya Nagar Majhara Re Hansla Lyrics

Kaya nagar majhara re,
Hansla jin khojya nistara.

Lagi lagan hiye bich gahri,
Kon hai metan wala,
Mastak upar likhi fakiri,
Lekh likhya kartara,
Kaya nagar majhara re,
Hansla jin khojya nistara.

Sinh aur syal donun rahta van ma,
Charta nyara nyara,
Ek din mel milyo machhli ko,
Sinh ne syar sudharya,
Kaya nagar majhara re,
Hansla jin khojya nistara.

Gagan mandal vich urad mukh kua,
Bahe amrit ka jhara,
Sugra sugra piv piv chakya,
Pyasa jaye gawara,
Kaya nagar majhara re,
Hansla jin khojya nistara.

Mahar bhai jad satguru miliya,
Kholya bharam ka tala,
Jaalimgiri satguru sharane,
Ram bhajya nistara,
Kaya nagar majhara re,
Hansla jin khojya nistara.

काया नगर मझारा रे हंसला जिण खोज्या निस्तारा लिरिक्स का अर्थ और संदेश

यह भजन हमें जीवन का गहरा सत्य समझाता है कि हमारा शरीर केवल एक साधन है और असली पहचान आत्मा की है। “हंसला” आत्मा का प्रतीक है, जो इस काया में रहते हुए भी परमात्मा की खोज में रहता है।

काया नगर मझारा रे हंसला जिण खोज्या निस्तारा लिरिक्स में बताया गया है कि मनुष्य अपने कर्मों और भाग्य के अनुसार जीवन जीता है, लेकिन जब उसे सतगुरु मिलते हैं, तब उसके जीवन का अंधकार दूर हो जाता है। “भरम का ताला” खुलने का अर्थ है अज्ञान का नाश होना और सच्चे ज्ञान का उदय होना।

“गगन मंडल” और “अमृत का झारा” आत्मज्ञान और दिव्य अनुभव के प्रतीक हैं, जिन्हें केवल सच्चे साधक ही प्राप्त कर पाते हैं। वहीं, जो लोग इस सत्य को नहीं समझते, वे जीवनभर भटकते रहते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश यही है कि मनुष्य को अपने भीतर झांकना चाहिए और सतगुरु की शरण में जाकर भक्ति करनी चाहिए। यही मार्ग उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर सकता है।

काया नगर मझारा रे हंसला जिण खोज्या निस्तारा लिरिक्स FAQs

Q1. काया नगर मझारा रे हंसला जिण खोज्या निस्तारा लिरिक्स भजन किस प्रकार का है?
Answer: यह एक चेतावनी और निरगुण भजन है, जो आत्मज्ञान का मार्ग दिखाता है।

Q2. “हंसला” का क्या अर्थ है?
Answer: “हंसला” आत्मा का प्रतीक है, जो शरीर में निवास करती है।

Q3. इस भजन में सतगुरु का महत्व क्या है?
Answer: सतगुरु ही अज्ञान दूर करके सही मार्ग दिखाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति कराते हैं।

Q4. “अमृत का झारा” क्या दर्शाता है?
Answer: यह आत्मज्ञान और आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक है।

Q5. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
Answer: अपने भीतर परमात्मा की खोज करना और सतगुरु की शरण लेना ही जीवन का सच्चा उद्देश्य है।

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