गुरु ज्ञान ध्यान को झबरक दिवलो हिंदी लिरिक्स प्रसिद्ध चेतावनी और ज्ञान भजन है, जो गुरु के ज्ञान और ध्यान की महिमा को दर्शाता है। इस भजन में बताया गया है कि जीवन के अंधकार को दूर करने के लिए गुरु का ज्ञान एक दीपक (दिवलो) की तरह काम करता है, जो सही मार्ग दिखाता है।
गुरु ज्ञान ध्यान को झबरक दिवलो हिंदी लिरिक्स
गुरु ज्ञान ध्यान को झबरक दिवलो,
हालो सत् के मारगाँ ॥टेर॥
आप सुवारथ सब जग राचै,
परमारथ कुण राचै ओ बाबाजी,
परमारथ रा राचणियाँ नर थोड़ा रे बीरा ॥1॥
हाथाँ में थारे झबरक दिवलो,
आंगनियो कोनी सूझे ओ बाबाजी,
पैड़ी ये दुहेली किस विध चढस्यो रे बीरा ॥2॥
समदरिये रा माणसिया थे,
तालरियाँ कांई रीइया ओ बाबाजी,
समदरिये में महंगा मोती निपजै रे बीरा ॥3॥
ओछे जल का मानसिया थारी,
तुष्णा कबुहूँ न भागै ओ बाबाजी,
पर नार्यों रा मोहेड़ा नर हीणा रे बीरा ॥4॥
तँवराँ मे टीकायत सिद्ध श्री,
रामदेवजी बोल्या ओ बाबाजी,
हाथ लगेड़ो माणसियो मत खोवो रे बीरा ॥5॥
सिंगर: श्री रति नाथ जी
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Guru Gyan Dyan Ko Jhabarak Diwalo Lyrics
Guru gyan dhyan ko jhabarak diwalo,
Halo sat ke maarga.
Aap suvarath sab jag racha,
Paramarath kun racha o babaji,
Paramarath ra rachaniya nar thoda re beera.
Hatha mein thare jhabarak diwalo,
Aanganiyo koni soojhe o babaji,
Paidi ye duheli kis vidh chadhasyo re beera.
Samdariye ra maansiya the,
Talariya kai riya o babaji,
Samdariye mein mahanga moti nipajai re beera.
Ochhe jal ka maansiya thari,
Tushna kabhu na bhaage o babaji,
Par naryo ra moheda nar heena re beera.
Tanwara mein tikayat siddh Shri,
Ramdevji bolya o babaji,
Haath lagedo maansiyo mat khovo re beera.
गुरु ज्ञान ध्यान को झबरक दिवलो भजन का अर्थ और संदेश
यह भजन हमें सिखाता है कि गुरु का ज्ञान हमारे जीवन में प्रकाश का काम करता है। “झबरक दिवलो” का अर्थ है चमकता हुआ दीपक, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है।
भजन में बताया गया है कि दुनिया के अधिकांश लोग केवल स्वार्थ में लगे रहते हैं, लेकिन परमार्थ (दूसरों के लिए भलाई) करने वाले बहुत कम होते हैं। यही सच्चा धर्म है।
“समंदर में मोती” का उदाहरण यह समझाता है कि सच्चा ज्ञान और आत्मज्ञान बहुत गहरा और दुर्लभ होता है, जिसे पाने के लिए मेहनत और सही मार्गदर्शन जरूरी है।
यह भजन यह भी बताता है कि जिन लोगों की सोच छोटी होती है (ओछे जल), उनकी इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती। इसलिए मनुष्य को अपने मन को नियंत्रित करके सतमार्ग पर चलना चाहिए।
अंत में, संतों और गुरु की वाणी हमें यह सिखाती है कि मानव जीवन बहुत अनमोल है, इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। गुरु के मार्गदर्शन में चलकर ही सच्चा सुख और मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।
गुरु ज्ञान ध्यान को झबरक दिवलो हिंदी लिरिक्स FAQs
Q1. गुरु ज्ञान ध्यान को झबरक दिवलो भजन का मतलब क्या है?
Answer: यह भजन गुरु के ज्ञान को दीपक के रूप में दर्शाता है, जो जीवन में सही मार्ग दिखाता है।
Q2. इस भजन में “झबरक दिवलो” क्या है?
Answer: यह चमकता हुआ दीपक है, जो अज्ञान को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।
Q3. “समंदर में मोती” का क्या अर्थ है?
Answer: इसका अर्थ है कि सच्चा ज्ञान दुर्लभ और गहरा होता है, जिसे पाने के लिए प्रयास करना पड़ता है।
Q4. यह भजन हमें क्या सिखाता है?
Answer: यह भजन सिखाता है कि हमें गुरु के मार्ग पर चलकर आत्मज्ञान प्राप्त करना चाहिए।
Q5. मानव जीवन को क्यों महत्वपूर्ण बताया गया है?
Answer: क्योंकि यह जीवन बहुत अनमोल है और इसे सही मार्ग में लगाकर मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।











