थारी म्हारी करता उमर खो दी सारी लिरिक्स

थारी म्हारी करता उमर खो दी सारी लिरिक्स (Thari Mhari Karta Umar Kho Di Saari Lyrics) प्रेरणादायक राजस्थानी भजन मनुष्य जीवन की सच्चाई और भक्ति के महत्व को दर्शाता है। भजन में बताया गया है कि इंसान पूरी उम्र “थारी-म्हारी” यानी मोह-माया और स्वार्थ में बिताता रहता है, लेकिन भगवान के भजन और सत्संग की ओर ध्यान नहीं देता।

थारी म्हारी करता उमर खो दी सारी लिरिक्स

छंद :-

तन की शोभा निवण हैं,
धन की शोभा दान।
वचन की शोभा मधुरता,
मन की शोभा ज्ञान।
मन की शोभा ज्ञान,
ध्यान ईश्वर का धरणा।
जीणा हैं दिन चार,
भलाई जुग में भरणा।
सत्पुरुषों के बीच में,
वार्ता जीवे जिनकी।
राम बक्स गुण कहत,
सील से शोभा तन की।

श्लोक :-

भजन बिना नहीं मानवी,
पशु कहो चाहे भूत।
लादू नाथ सत्संग बिना,
ये जम मारेला जूत।।

भजन की नहीं विचारी रे लिरिक्स

भजन की नहीं विचारी रे,
भजन की नाय विचारी रे,
थारी म्हारी कर कर,
उमर खो दी सारी रे।। टेर।।

नव दस मास गर्भ के माही,
घणो दुखयारी रे,
अब तो बायर काड,
भक्ति करसू थारी रे।
भजन की नाय विचारी रे,
थारी म्हारी कर कर,
उमर खो दी सारी रे।। टेर।।

बाल पणे में लाड लडायो,
माता थारी रे,
भरी जवानी भयो दीवानों,
तिरिया प्यारी रे।
भजन की नाय विचारी रे,
थारी म्हारी कर कर,
उमर खो दी सारी रे।। टेर।।

कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी,
पड्यो हजारी रे,
धर्म बिना थू रितो जासी,
कोल विचारी रे।
भजन की नाय विचारी रे,
थारी म्हारी कर कर,
उमर खो दी सारी रे।। टेर।।

जब थने कहता बात धर्म की,
लागे खारी रे,
कोड़ी कोड़ी खातिर लेवे,
राड़ उधारी रे।
भजन की नाय विचारी रे,
थारी म्हारी कर कर,
उमर खो दी सारी रे।। टेर।।

रुक गया कंठ दसू दरवाजा,
मण्ड गी ग्यारी रे,
कहत कबीर सुणो भाई सन्तों,
करणी थारी रे।
भजन की नाय विचारी रे,
थारी म्हारी कर कर,
उमर खो दी सारी रे।। टेर।।

भजन की नही विचारी रे,
भजन की नाय विचारी रे,
थारी म्हारी कर कर,
उमर खो दी सारी रे।। टेर।।

यह डांगडी रात के भजन लिरिक्स भी पढ़े:

थारी म्हारी करता उमर खो दी सारी लिरिक्स भजन का अर्थ

इस भजन में संत कवियों ने मनुष्य जीवन की अस्थिरता और भक्ति के महत्व को समझाया है। इंसान पूरी उम्र धन, परिवार और मोह-माया में उलझा रहता है लेकिन भगवान के भजन और सत्संग की ओर ध्यान नहीं देता।

भजन यह संदेश देता है कि अंत समय में धन-दौलत साथ नहीं जाती, केवल अच्छे कर्म और प्रभु भक्ति ही मनुष्य का सहारा बनते हैं।

थारी म्हारी करता उमर खो दी सारी लिरिक्स भजन का सारांश

“थारी म्हारी करता उमर खो दी सारी” एक लोकप्रिय राजस्थानी सत्संग भजन है जो जीवन की सच्चाई को सरल शब्दों में समझाता है।

इस भजन के माध्यम से भक्तों को सत्संग, भजन और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। यह भजन विशेष रूप से सत्संग, कथा और भजन संध्या में गाया जाता है।

थारी म्हारी करता उमर खो दी सारी लिरिक्स FAQs

Q.1 थारी म्हारी करता उमर खो दी सारी लिरिक्स भजन किस विषय पर आधारित है?

Answer: यह भजन मनुष्य जीवन, भक्ति और मोह-माया की सच्चाई पर आधारित है।

Q.2 यह भजन किस भाषा में है?

Answer: यह एक लोकप्रिय राजस्थानी सत्संग भजन है।

Q.3 इस भजन में क्या संदेश दिया गया है?

Answer: इस भजन में भगवान के भजन, सत्संग और अच्छे कर्मों का महत्व बताया गया है।

Q.4 यह भजन कब गाया जाता है?

Answer: यह भजन सत्संग, कथा और भजन संध्या में गाया जाता है।

Q.5 क्या इस भजन के Lyrics हिंदी और English दोनों में उपलब्ध हैं?

Answer: हां, यहां इस भजन के Lyrics हिंदी और English दोनों भाषाओं में दिए गए हैं।

Follow & Join Our Community

Leave a Comment

WhatsApp Chat Button