गठडी छोड़ चला बंजारा लिरिक्स

गठडी छोड़ चला बंजारा लिरिक्स प्रसिद्ध काया हंसला भजन जीवन की नश्वरता और आत्मा के सत्य को दर्शाता है। भजन में “गठड़ी” मानव शरीर और संसार के मोह का प्रतीक है, जिसे एक दिन छोड़कर हर जीव को जाना पड़ता है।

गठडी छोड़ चला बंजारा भजन लिरिक्स

छोड़ चला रे बंजारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।।

इस गठरी में चांद और सूरज,
इसमें नौ लख तारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।
छोड़ चला रें बंजारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।।

इस गठडी मे सात समुंदर,
कोई मीठा ने खारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।
छोड़ चला रें बंजारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।।

इस गठरी में नौबत बाजे,
अनहद का झंकारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।
छोड़ चला रें बंजारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।।

कहत कबीर सुनो भाई साधु,
कोई समझो समझन हारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।
छोड़ चला रें बंजारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।।

छोड़ चला रे बंजारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।।

सिंगर: नन्दलाल जी

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Gathadi Chhod Chala Banjara Lyrics

Chhod chala re banjara,
Gathadi chhod chala banjara.

Is gathri mein chaand aur suraj,
Isme nau lakh taara,
Gathadi chhod chala banjara.

Is gathdi me saat samundar,
Koi meetha ne khaara,
Gathadi chhod chala banjara.

Is gathri mein naubat baaje,
Anhad ka jhankaara,
Gathadi chhod chala banjara.

Kahat Kabir suno bhai saadhu,
Koi samjho samjhan haara,
Gathadi chhod chala banjara.

गठडी छोड़ चला बंजारा लिरिक्स भजन का अर्थ

यह भजन बताता है कि यह शरीर और संसार केवल कुछ समय के लिए मिला हुआ है। “गठड़ी” शरीर और सांसारिक मोह-माया का प्रतीक है, जिसे मृत्यु के समय मनुष्य छोड़कर चला जाता है।

भजन में चांद, सूरज, तारे और सात समुंदर का उल्लेख करके यह समझाया गया है कि पूरा संसार इसी शरीर में समाया हुआ प्रतीत होता है, लेकिन अंत में सब यहीं रह जाता है।

गठडी छोड़ चला बंजारा लिरिक्स भजन का संदेश

यह काया हंसला भजन हमें वैराग्य और आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है। संसार की दौलत, शरीर और मोह किसी के साथ नहीं जाते। केवल अच्छे कर्म, भक्ति और भगवान का नाम ही सच्चा सहारा बनते हैं।

कबीरदास जी इस भजन के माध्यम से कहते हैं कि जो व्यक्ति जीवन के इस गहरे रहस्य को समझ लेता है, वही सच्चा ज्ञानी कहलाता है।

गठडी छोड़ चला बंजारा लिरिक्स FAQs

Q1. गठडी छोड़ चला बंजारा लिरिक्स भजन किस प्रकार का है?
Answer: यह एक काया हंसला और निर्गुण भजन है।

Q2. इस भजन में “गठड़ी” का क्या अर्थ है?
Answer: गठड़ी मानव शरीर और सांसारिक मोह का प्रतीक है।

Q3. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
Answer: संसार और शरीर नश्वर हैं, इसलिए भक्ति और सत्कर्म करना चाहिए।

Q4. इस भजन में किस संत का उल्लेख है?
Answer: संत कबीरदास जी का उल्लेख किया गया है।

Q5. यह भजन हमें क्या सीख देता है?
Answer: जीवन में मोह-माया छोड़कर ईश्वर भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए।

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